रामायण काल के 16 जिंदा सबूत – Proof Of Ramayan (Ramayan ke Saboot)

Proof Of Ramayan

Ramayan ke Saboot – दोस्तों रामायण भारत के सबसे प्रसिद्ध ग्रंथों में से एक है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रामायण में भगवान राम की संपूर्ण जानकारी लिखी गई है लेकिन कुछ लोग भगवान के होने पर ही सवाल उठाते हैं और रामायण को केवल कहानियों से भरी एक किताब मानते हैं। तो वहीं कई धर्मावलंबियों का यह पुर्ण विश्वास हे कि रामायण में वर्णित घटनाएं वास्तव में घटित हुई थीं।

हम यहां पर इस विवाद के ऊपर कोई निर्णय तो नहीं दे रहे हैं, लेकिन आज हम आपके सामने इसके सत्य होने के सबूतों को आपको बताएंगे जिन्हें देखकर आप आप खुद इस निर्णय पर पहुंच जाएंगे कि रामायण मैं वर्णित घटनाएं कोई काल्पनिक रचनाएं नहीं बल्कि सच्ची घटनाएं थी।

श्रीलंका के इंटरनेशनल Ramayan रिसर्च सेंटर ने  रामायण से जुड़े 50 ऐसे स्थल ढूंढ लिए हैं, जिनका पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व है और जिनका रामायण में भी उल्लेख मिलता है।

 

1. रावण का महल

लंकापति रावण के महल के अवशेष आज भी श्रीलंका में मौजूद है। यह वही महल है, जिसमें रावण अपनी पटरानी मंदोदरी के साथ निवास करता था, इस महल को पवनपुत्र हनुमान ने लंका के साथ जला दिया था। इस जले हुए महल के अवशेष आज देखे जा सकते हैं।

 

2. कोबरा हूड केव

रामायण के अनुसार रावण ने सीता का हरण करके सबसे पहले इसी गुफा में रखा था। इस गुफा का का आकार एक सांप के सिर जैसा दिखाई देता है, जिसके कारण इस गुफा को कोबरा हूड के नाम से भी जाना जाता है, इस गुफा के अन्दर चारों ओर की नक्काशी से साफ पता चलता है कि यह रामायण कालीन गुफा है, और यह गुफा आज भी श्रीलंका में मौजूद है।

 

3. पानी में तैरने वाले पत्थर

रामसेतु पुल के पत्थर पानी पर तैरते थे सुनामी के बाद रामेश्वरम के उन पत्थरों में से कुछ जमीन पर आ गए थे। शोधकर्ताओं के अनुसार रामसेतु को बनाने के लिके लिए विशेष प्रकार के पत्‍थर का इस्तेमाल किया गया था जिसे विज्ञान की भाषा में ‘प्यूमाइस स्टोन’ कहते हैं।

शोधकर्ताओं ने जब इन पत्थरों को पानी में फेंका तो वह तैर रहे थे जबकि दूसरे पत्थर पानी में डूब जाते थे। रामेश्वरम में आई सुनामी के दौरान यह पत्थर दिखाई दिए थे‌। आपको बता दे कि आज भी कई साधु संतों के पास तैरने वाले इस पत्थर मोजूद हैं।

 

4. हनुमान गढ़ी

माना जाता है कि श्रीराम की प्रतीक्षा हनुमानजी इसी स्थल पर करते थे। रामायण के अनुसार जब सीता माता का अपहरण हुआ था तो राम जी की मुलाकात हनुमान जी से हुई। यह एक प्राचीन हनुमान मंदिर है, जिसे हनुमानगढ़ी के नाम से जाना जाता है।

कहा जाता है कि लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को यह जगह रहने को दिया था,जिसके कारण इसे हनुमान जी का घर भी कहा जाता है। बता दें कि रामायण में भी हनुमानगढ़ी का उल्लेख किया गया है।

 

5. रामायण कालीन हवाई अड्डे

श्रीलंका की Ramayan अनुसंधान टीम ने रावण के रामायण कालीन चार हवाई अड्डे खोजने का दावा किया है।  श्रीलंका की श्री रामायण रिसर्च कमेटी के अनुसार रावण के 4 हवाई अड्डे थे। उनके 4 हवाई अड्डों के नाम कुछ इस तरह है – उसानगोड़ा, गुरुलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला।

इन 4 में से एक उसानगोड़ा हवाई अड्डा नष्ट हो गया था। कमेटी के अनुसार सीता की तलाश में जब हनुमानजी लंका पहुंचे तो लंका दहन में रावण का उसानगोड़ा हवाई अड्डा नष्ट हो गया था। उसानगोड़ा हवाई अड्डे को स्वयं रावण निजी तौर पर इस्तेमाल करता था।

 

6. द्रोणागिरी पर्वत

Ramayan के कथा में उल्लेख किया गया है कि लक्ष्मण और मेघनाथ के युद्ध में मेघनाथ के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे। तब राजवैद्य सुरोन के उपाय के अनुसार द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाना था। तब हनुमान जी संजीवनी लेने द्रोणागिरी पर्वत गए थे. उन्हें संजीवनी की पहचान नहीं थी तो उन्होंने पूरा पर्वत ले जाने का निर्णय लिया।

जिसमे से संजीवनी बूटी निकाल कर लक्ष्मण के प्राण की रक्षा की गई। लक्ष्मण जी के ठीक होने के बाद हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत उसी स्थान पर रख दिया, यह पर्वत आज भी श्रीलंका में मौजूद है, और जब वैज्ञानिकों ने इस पर्वत पर रीसर्च की तो पता चला कि इस पर्वत पर वही जड़ी बूटियां मौजूद है जो सिर्फ हिमालया पर्वत पर ही पाई जाती है।

 

7. लेपाक्षी मंदिर

सीता हरण के बाद रावण माता सीता को जिस मार्ग से लंका ले जा रहे थे, उस मार्ग पर राम भक्त जटायु ने रावण को रोकने के लिए युद्ध किया, लेकिन रावण ने जटायु के दोनो पँख काट के उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। जिसके बाद वो घायल अवस्था में श्रीराम के सामने गिरे और उनकी गोद में ही अपने प्राण त्याग दिए। जिस स्थल पर जटायु गिरे, वहां लेपाक्षी मंदिर का निर्माण किया गया। यह मंदिर आज भी आंध्र प्रदेश में देखा जा सकता है।

 

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8. पंचवटी

दोस्तों जब राम सीता और लक्ष्मण वनवास के लिए अयोध्या छोड़ कर गए थे तो उन्होंने यहीं पर झोपड़ी बनाकर अपना वनवास पूरा किया था। और साथ में यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा का नाक भी काटा था। यह पंचवटी तपोवन आज भी नासिक में स्थित है और यहीं पर सीता गुफा नाम से एक गुफा भी मौजूद है।

 

9. कोणेश्वरम मंदिर

जैसा की आप सभी जानते हैं कि रावण भगवान शिव की पूजा करता था, और इसलिए उसने भगवान शिव के लिए इस मंदिर का निर्माण भी कराया था। आपको बता दें कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान शिव से ज़्यादा उनके भक्त रावण की आकृतियां बनी हुई है। बता दें कि इस मंदिर में बनी एक आकृति में रावण के दस सिरों को दिखाया गया है।

 

10. हनुमानजी के पैरों के निशान 

हनुमान जी ने जब सीता जी की खोज के लिए समुद्र पार किया था तो उन्होंने विशाल रूप धारण किया था । फिर वह आकाश मार्ग से समुद्र पार करके श्रीलंका पहुंच गए थे । ऐसा कहां जाता है जहां उन्होंने पहले कदम रखे वहां-वहां उनके पैरों के निशान बन गए यह निशान आज भी वहां की चट्टानों पर मौजूद है। इसके अलावा रावण ने माता सीता का हरण करके उन्हें अशोक वाटिका में बंदी बनाकर रखा था। उसके पास एक झरना भी है।

इसी झरने के पास ही हनुमान जी के पैरों के चिह्न प्राप्त हुए हैं। कार्बन डेटिंग से जांच करने पर इन पद चिन्हों की उम्र लगभग 7 हजार वर्ष पूर्व की आंकी गई है। इसके अलावा भी बहुत सी ऐसी जगह है जहां पर भगवान हनुमान जी के पैरों के निशान मिलने का दावा किया गया है। 

 

11. रामसेतु 

रामसेतु को एडम्स ब्रिज भी कहां जाता है यह भारत के दक्षिण-पूर्वी तट के किनारे रामेश्वरम  द्वीप के मध्य चूना पत्थर से बनी एक श्रृंखला है। भौगोलिक प्रमाणों से पता चलता है कि किसी समय यह सेतु भारत और श्रीलंका को भूमि मार्ग से आपस में जोड़ता था। वाल्मीकि के अनुसार नल और नील के सान्निध्य में वानर सेना ने 5 दिन में 30 किलोमीटर लंबा और 3 किलोमीटर चौड़ा पूल तैयार किया था।

रामसेतु एक बार फिर सुर्खियों में तब आया जब नासा के उपग्रह द्वारा लिए गए फोटो मीडिया में सुर्खियां बने थे । समुद्र पर बने सेतु को राम जी की दूसरी विजय कहां जा सकता है क्योंकि रावण को विराट समुद्र की तरफ से किसी से कोई खतरा नहीं था । आज भी रामसेतु का होना Ramayan को सच साबित करने का सबसे बड़ा साक्ष्य है।

 

12. रावण का शव 

ऐसा माना जाता है कि रैगला (रानागिल) के जंगलों के बीच एक विशालकाय पहाड़ी पर रावण की गुफा है, जहां उसने घोर तपस्या की थी। उसी गुफा में आज भी रावण का शव सुरक्षित रखा हुआ है। रैगला के घने जंगलों और गुफाओं में कोई नहीं जाता है, क्योंकि यहां जंगली और खूंखार जानवरों का बसेरा है।

रैगला के इलाके में रावण की यह गुफा 8 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है। जहां 17 फुट लंबे ताबूत में रखा है रावण का शव। आपको बता दें कि इस ताबूत के बाहर एक खास तरह का लेप लगा हुआ है, जिसके कारण यह ताबूत हजारों सालों  से जैसा था वैसा ही है।

 

13. सुग्रीव की गुफा

बाली के डर से सुग्रीव जिस गुफा में रुके थे वह गुफा आज भी मौजूद है। यहीं पर उनकी मुलाकात राम जी से हुई बाद में राम जी ने बाली का वध किया और सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बना दिया था।

 

14. अशोक वाटिका 

वर्ष 2004 में पंजाब के बांगा इलाके के रहने वाले अशोक कैंथ ने श्रीलंका में अशोक वाटिका की खोज की बता दें कि Ramayan में वर्णित अशोक वाटिका आज भी श्रीलंका में स्थित है जहां रावण ने सीता माता को हरण करने के पश्चात कैद करकर रखा था। इस क्षेत्र में लाखों की तादाद में आज भी अशोक के लंबे-लंबे वृक्ष विद्यमान हैं।

अशोक वृक्षों की अधिकता होने के कारण ही इसे अशोक वाटिका कहा जाता है। आज इस जगह को सीता एलीया के नाम से जाना जाता है, जो नूवरा एलिया नामक जगह के पास स्थित है। बता दें कि यहां आज सीता का मंदिर है और पास ही एक झरना भी है।

 

15. जानकी मंदिर

नेपाल में जनकपुर नाम का एक शहर है, वहां पर जानकी मंदिर है Ramayan मैं उल्लेख मिलता है कि सीता माता के पिताजी का नाम जनक था, जिसके कारण इस शहर का नाम जनकपुर रखा गया था। बता दें कि सीता माता को जानकी के नाम से भी जाना जाता है इसी वजह से इस मंदिर को जानकी मंदिर कहते हैं। बता दें कि यहां हर रोज दर्शन के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। 

 

16. रामलिंगम

भगवान राम ने जब रावण का वध था, क्योंकि उन्होंने एक ब्राह्मण को मारा था। इसलिए भगवान राम को पश्चाताप करना था, इसके लिए उन्होंने भगवान शिव की आराधना की थी। तब भगवान शिव ने उन्हें 4 शिवलिंग बनाने के लिए कहां तब एक रेत का शिवलिंग सीता ने बनाया, दो शिवलिंग हनुमान जी कैलाश पर्वत से लेकर आए थे और एक शिवलिंग को स्वयं भगवान् राम ने बनाया था, जो आज भी इसी मंदिर में स्थित है, इसीलिए इस जगह को रामलिंगम कहा जाता हैं। 

 

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